PRIYA SHARMA रात खामोश हो और तू करीब आ जाए, धड़कनों को भी फिर अजीब सा खुमार आ जाए। लब कुछ ना कहें, बस नज़रें बात करें, ऐसा लगे जैसे हर ख्वाब साकार हो जाए।