Jaya Kishori__
चिन्तन
स्वाति की बूँदें
जीवन्मुक्ति के बाद भी एक सूक्ष्म अहम् रहता है, पर इस बात का सबको पता नहीं है | यह सूक्ष्म अहम् बन्धन कारक तो नहीं होता, पर मतभेद करने वाला तो होता है
परमप्रेम की प्राप्ति होने पर यह सूक्ष्म अहम् सर्वथा मिट जाता है | असली पूर्णता प्रेम की प्राप्ति में ही होती है
सब ज्ञानी प्रेमी हों- यह नियम नहीं है, पर सब प्रेमी ज्ञानी होंगे- यह नियम है
ज्ञान केवल जीव को ही होता है, ब्रह्म को नहीं, क्योंकि ब्रह्म तो ज्ञानस्वरूप ही है | परन्तु प्रेम भक्त तथा भगवान्– दोनों में होता है | प्रेम दोनों तरफ से होता है
माधुर्य’ के अन्तर्गत सभी रस आ जाते हैं | दास्य, सख्य और वात्सल्य– तीनों रस ‘माधुर्य’ में रहते हैं इसलिये ‘माधुर्य’ को रसराज कहते हैं
प्रेम होता है– भगवान् को अपना मानकर याद करने से
नारायण! नारायण!! नारायण
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