सारिका सिंह (मनी )
बस एक उसने नहीं चाहा…..
लगा दी जिस पर जान की बाजी
उस जान ने जान को नहीं चाहा…..
उसकी फितरत मुबारक उसे
फैसला तो होगा ये रब तेरी अदालत मे
उसने मुझे चाहा या मेने उसे चाहा…..
खुलेगी इश्क की किताब यहां नहीं तो वहाँ खुलेगी
बताएंगे फरिस्ते किसने जफ़ा की किसने वफ़ा को चाहा 🙏
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