Pravin Patel कुछ रिश्ते शौर से नहीं। खामोशी से पलते हैं जहां लफ्ज कम पड जाए वहां धड़कने अपना काम खुद कर लेती है। ना कोई वादा ना कोई दिखावा फिर भी हर सांस के साथ एक नाम जुडा रहता है बिना कहे बिना सुने