Jyoti Mishra रात भर की जागी हुई तुम्हारी आँखें, क्यों ना, अधखुले बालों को बिखेर दिया जाए। तुम्हारे हाथों में थमा दिया जाए चाय का कप, नशा कोई बाकी हो तो लिख दिया जाए।