Neetu Nain
जहां कहने की जरुरत
आन पड़े वो प्यार भला फिर कैसा..
जहां कहने से इज्ज़त और
शान घटे वो इज़हार भला फिर कैसा..
जहां मन में वैमनस्य रहे और
दिल में गुबार भरे वो इकरार भला फिर कैसा..
जहां संभावनाओं को दरकिनार करे
और बात बात पर तकरार करें,
वो संवाद भला फिर कैसा..
जहां रिश्तों में हो मजबूरियां,
बेअदबियां,बेरुखियां वो उल्लास भला फिर कैसा..
कहने को बस साथ रहे,
बची ना कोई जज़्बात रहे वो संस्कार भला फिर कैसा..
मिलने की ना जहां आस रहे ,
चाहत की बुझी प्यास रहे वो विश्वास भला फिर कैसा..
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