सुनीता पाण्डेय 'सुरभि' हर नज़र से बचाकर नज़र। देखती हूँ तुझे हर पहर।। धड़कनें गा रहीं हैं तुझे, रात-दिन और शामो-सहर। होके बेताब दिल कह रहा, पास आ मेरे कुछ पल ठहर। छाँव सपनों की दे दे मुझे, हमसफ़र ऐ मेरे हमसफ़र। - सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'ⓢ💞