Gupta Manjari प्रेमी का श्रृंगार उसके वस्त्रों में नही बल्कि उसकी आत्मा पर पड़ी चोटों में भी होता है और जो उन चोटों को चूम सके जो वही प्रेम का अधिकारी कहलाता है।