बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
पुराने जमाने में एक देशभक्ति की फिल्म उपकार आई थी इस हिंदी फिल्म में अभिनेता मनोज कुमार के साथ चरित्र अभिनेता प्राण ने काफी लोकप्रियता अर्जित की थी। जहां मनोज कुमार द्वारा पर्दे पर मेरे देश की धरती की प्रस्तंति की थी वही प्राण ने कसमें – वादे प्यार वफा, सब बाते हैं बातों का क्या, कोई किसी का नहीं यह झूठे वादे हैं वादों का क्या की प्रस्तुति से लोगों का दिल जीत लिया था। वैसे तो यह हिंदी फिल्म काफी पुरानी है लेकिन वर्तमान में बदायूं के राजनेतिक वातावरण पर पूरी तरह सटीक बैठ रहीं है। विदित रहे कि बदायूं की छह विधानसभा सीटों में तीन सीटों पर भाजपा और तीन सीटों पर सपा के उम्मीदवार विधायक चुने गए थे। वर्तमान वातावरण पर चिंतन किया जाए तो एक बात साफ नजर आ रही है कि जनपद के एक विधायक झंडा परिवर्तन कर चुके हैं और आगामी चुनाव में अपने पुराने क्षेत्र से नया झंडा लेकर मैदान में नजर आएगें लेकिन ऐसे में उनसे पिछले चुनाव में पराजित होने वाले उम्मीदवार कौन से रथ पर सवार होगें अभी इस पर खामोसी की चादर लगी हुई है। जनपद में एक विधायक के पीछे अपनी ही पार्टी के पूर्व मंत्री झंडा बरदार होने की तैयारी में खुलेआम नजर आ रहे हैं। बस एक विधायक हैं जिनको अपनों से अभी तक कोई खतरा नहीं दिख रहा है। अब दूसरे खेमें की तरफ निगाहबान हुआ जाये तो पूरी फिल्म में ससपेंस नजर आ रहा है, बताते हैं कि वर्तमान में जनपद की राजनीति के शक्तिमान अपने पुत्र को लेकर गुणाभाग कर रहे हैं और उनका गुणाभाग अगर सत्य है और उनको कामयाबी मिल गई तो जिले की राजनीति का इतिहास और भूगोल के साथ हवाओं का रूख बदला नजर आ सकता है। हालांकि अभी तक इस बात को तमाम लोग कोरी करारी कहानी बताते हुए कहते हैं कि इस कहानी में कोई दम नहीं है लेकिन इस बात को सभी मानते हैं कि अगर कहानी में थोडा सा भी दम होगा तो राजनेतिक महासंग्राम की स्थति भी काफी अलग नजर आएगी।
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