neelam
जिस तन को छुआ तूने
उस तन को छुपाए,
जिस मन को लागे नैना
वो किसको दिखाऊं,
ओ मोरे चंद्रमा
तेरी चांदनी अंग लगाये,
तेरी ऊंची अटारी
मैने पंख लिये कटवाए,
दिल हूम-हूम करे
घबराए,
घन, धम -धम करे
गरजाए,
इक बूंद कभी पानी की
मोरी अंखियों मे बरसाए…..❤️💜🧡
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