Chaudhary Sahiba
अजीब सलीका है उसकी यादों का मेरे दिल में
जब भी आती हैं आँखों में नमी छोड़ जाती हैं
वो एक शख्स जो कभी मेरी धड़कन हुआ करता था आज बेरुखी मुझे तन्हा छोड़ जाती है
ये दिल आज भी उसी राह पर मुड़ जाता है
टूटे हुए शीशे में शक्ल धुंधली नजर आती है मगर टूटा हुआ दिल हर चेहरे में उसी को पाता है
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