बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं के मतदाताओं ने आजादी के बाद पहले प्रसोपा और फिर कांग्रेस, उसके उपरांत जनसंघ, लोकदल, जनता पार्टी, सजपा, दमकिपा फिर सपा और भाजपा सबको क्षेत्र के विकास की बागडोर सौंपी लेकिन ऐसा लगता है कि आम आदमी की जरूरत और क्षेत्र के विकास की राह पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। बदायूं से सांसद बनने के बाद जनपद को पहला गौरव दिलाने वाले सांसद शरद यादव और बदायूं में सबसे लम्बी राजनेतिक पारी खेलने वाले सांसद सलीम इकबाल शेरवानी को बदायूं वाले अपनी राजनीति चमकाने और क्षेत्र के विकास पर ध्यान ना देने का आरोप लगाते हैं तो इसमें गलत क्या है। सांसद की भूमिका पर गौर करें तो धर्मेन्द्र यादव ने जनपद में विकास कार्य किये लेकिन उनकी अपनी पार्टी के लोगों ने चैन की सांस श्री यादव की विदाई कराके ली। भाजपा सांसद रहीसंघमित्रा मौर्य का पूरा कार्यकाल इसी बात में गुजर गया कि वह भाजपा की सांसद हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी पटरी कभी नहीं बैठी। अब आदित्य यादव बदायूं के संासद हैं लेकिन बदायूं के आम आदमी से उनकी दूरी चर्चा का कारण बनी हुई है।
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