HINA_JAISWAL
फूलों मे जो नूर है, मेरा ही सुरुर है
आँखो मे गुरुर है ख्वावो का कुसुर है
थोडा सा करार है थोडा सा खुमार है
किस का इंतजार है कैसा इंतजार है
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आई मै तो आई नजारों के
अंजाने इक जहाँ से
लाई मै तो लाई बहारों के
अफसाने भी वहाँ से
ना ना मुझे छुना ना दूर रहना
परी हूं मै
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