Ravina Mishra
खुली किताब सी है महिला..
मगर हर कोई पढ़ले इतना काबिल भी नहीं,
सरल भाषा सी है महिला
मगर हर कोई अर्थ समझले इतना ज्ञानी भी नहीं,
बहुत ही आम सी है महिला
मगर हर कोई मोल समझे, इतना अपना भी नहीं,
बस पहेली सी है महिला
मगर हर कोई सुलझाले, इतना समझदार भी नहीं।
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