Ravina Mishra
अनपेक्ष: श्रुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथ:।
सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्त:स मे प्रिय:।
:मेरे भक्त,जो सामान्य कार्य कलापों पर आश्रित नहीं है,जो शुद्ध है,चिन्ता रहित है, समस्त कष्टों से रहित है किसी फल के लिए प्रयत्नशील नहीं है,मुझे अतिशय प्रिय है।
जय श्री राधे कृष्णा।
शुभ प्रभात।
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