Pushpa सदा प्रिय लगने वाली बातें कहने वाले लोग तो सर्वत्र सुलभ हैं लेकिन सुनने में अप्रिय किन्तु परिणाम में हितकर बातें कहने और सुनने वाले, दोनों ही दुर्लभ हैं