Gunjan Agrawal
हमारी “इच्छाएं” उन तितलियों की तरह होती हैं,
जो घुमक्कड़ होती हैं और जिनमें..
ठहराव का अभाव होता है..!!!
हमारी इच्छाएं उस “मृग” की भांति होती है,
जिसके भीतर ही कस्तूरी होती है..
फिर भी वह उसकी सुगंध के वशीभूत होकर,
उसे ढूंढ़ता फिरता है..!!!!
गुंजन शिशिर
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