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शारदीय नवरात्र 2025 नवम दिवस: मां सिद्धिदात्री पूजन आज

शारदीय नवरात्र 2025
नवम दिवस: मां सिद्धिदात्री पूजन आज
आचार्य राजेश कुमार शर्मा

चैत्र नवरात्रि की नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार सायं 6:18 से नवमी तिथि आरंभ हो रही है, समापन बुधवार रात्रि 7:02 पर होगा ऐसे में 1 अक्टूबर को नवमी मनाई जाएगी। आप इस तिथि पर कन्या पूजन के साथ-साथ अपने व्रत का पारण भी कर सकते हैं। नवमी तिथि पर मां दुर्गा के नौवें और अंतिम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है‌। मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और सुशोभित होता है। उनके चार हाथ होते हैं, जिसमें एक हाथ में शंख, दूसरे हाथ में चक्र, तीसरे हाथ में गदा और चौथे हाथ में कमल का फूल होता है। मां का वाहन सिंह है और वे कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियों, भौतिक सुख-संपत्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए उपदेश देती हैं।

​मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

नवमी के दिन, सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
एक साफ आसन पर बैठकर मां सिद्धिदात्री की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
दीपक, अगरबत्ती और पुष्प अर्पित करके मां को मन से प्रणाम करें।
इसके बाद मां सिद्धिदात्री को भोग लगाएं‌।
मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करें और उन पर श्रद्धा भाव से ध्यान केंद्रित करें।
अंत में मां की आरती उतारें और परिवार में मां का प्रसाद बाटें।

मां सिद्धिदात्री का मंत्र

सिद्ध गन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

बीज मंत्र

ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

मां सिद्धिदात्री का भोग

मां सिद्धिदात्री को तिल और मेवे से बने व्यंजनों का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

मां सिद्धिदात्री शुभ रंग

नवरात्रि की नवमी तिथि को बैंगनी या जामुनी रंग पहनना शुभ होता है।

मां सिद्धिदात्री की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुरों के अत्याचार से देवता परेशान हो गए, तब उन्होंने भगवान शिव और विष्णु से मदद मांगी। देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा गया‌। भगवान शंकर ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था। सिद्धिदात्री देवी की कृपा से शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।

आचार्य राजेश कुमार शर्मा
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