
Ravina
सांख्ययोगौ पृथग्बाला: प्रवदन्ति न पण्डिता:।
एकमप्यास्थित: सभ्यगुभयोर्विन्दते फलम्।।
:- अज्ञानी ही भक्ति को भौतिक जगत् के विश्लेषणात्मक अध्ययन से भिन्न कहते हैं। जो वस्तुतः ज्ञानी हैं,कहते हैं कि जो इनमें से किसी मार्ग का भलीभाँति अनुसरण करता है, वह दोनों के फल प्राप्त करता है।
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