Gunjan Agrawal
मैं कभी तुम्हारी उस “शाम” का हिस्सा बनना चाहूंगी,
जिसे संवादों से परहेज हो और जिसने खामोशी को आलिंगित किया हुआ हो…
जहां लब नहीं सिर्फ अश्क बोलते हो..
जहां बैचेनियों का शोर नहीं ,
बल्कि सुकून गायन करता हो..
जहां भीड़ नहीं
बल्कि एकांत हमारे मिलन का गवाह हो..!!!
गुंजन शिशिर
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