बदांयू 18 सितंबर।
दुर्गा पूजा से लेकर दीपावली तक का मौसम जिले के बाजार को एक हजार करोड़ रुपये की रौनक देने जा रहा है। दुर्गा पूजा पंडालों की साज-सज्जा, कपड़े और मिठाइयों की खरीद से ही माहौल बनने लगा है। दीपावली तक यह उत्साह कई गुना बढ़ने वाला है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार उपभोक्ता खर्च बीते सालों से 15-20 प्रतिशत अधिक रहेगा। मगर जीएसटी के गणित ने व्यापारियों की तैयारियों को उलझाकर रख दिया है। उनके सामने सबसे बड़ा असमंजस स्टॉक मंगवाने को लेकर है। कारण यह कि 22 सितंबर से जीएसटी की नई दर लागू होने जा रही है, जिसमें कई वस्तुओं की कीमतें घट जाएंगी।
थोक व्यापारी स्टॉक का ऑर्डर इस समय दे रहा है तो मौजूदा दर से जीएसटी लगाकर उसे मिल रहा है जबकि उसे 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरों पर ही बेचना होगा, ऐसे में पूंजी फंस सकती है। इसलिए व्यापारी ऊहापोह में हैं और स्टॉक जमा करने के लिए खरीदारी करने से परहेज कर रहे हैं। इसके साथ ही व्यापारियों को जीएसटी दरों में बदलाव की वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) समायोजन में दिक्कत की चिंता भी सता रही है।
22 सितंबर से शुरू होने जा रहे शारदीय नवरात्र के साथ ही जीएसटी की दरों में बदलाव लागू किया जा रहा है। 28 प्रतिशत जीएसटी वाले कई सामान 18 प्रतिशत के दायरे में लाए गए हैं तो कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी 12 से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। कुछ वस्तुओं पर जीएसटी 18 से घटाकर पांच प्रतिशत भी कर दिया गया है। ऐसे में व्यापारी इस समय जो माल खरीदेंगे, उस पर ज्यादा जीएसटी देना होगा। एक सप्ताह बाद वही माल कम टैक्स पर बिकेगा।
व्यापारी कहते हैं कि अभी जो माल 28 प्रतिशत जीएसटी पर मिलेगा वही एक सप्ताह बाद 18 या 12 प्रतिशत जीएसटी पर मिलेगा। बाद में जब खरीदे गए माल की आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) समायोजित करनी होगी तो 28 की जगह 18 प्रतिशत ही आइटीसी समायोजित होगी। इस तरह 10 प्रतिशत आईटीसी उनके क्रेडिट लेजर में ही पड़ी रह जाएगी जिसे समायोजित करना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे में व्यापारी पूंजी सुरक्षित करने के साथ त्योहार के लिए स्टॉक जमा करने को लेकर भी चिंतित हैं। व्यापारियों का मानना है कि जीएसटी की नई दरें लागू होने के बाद कंपनियां नए रेट पर माल बाजार में उतारेंगी। ऐसे में कई व्यापारी 22 तारीख का इंतजार कर रहे हैं।
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कृषि यंत्र के थोक कारोबारी राकेश चौधरी ने बताया कि जीएसटी स्लैब बदलने से बुकिंग बढ़ी है। माल पुराने दर पर ही मंगवा रहे हैं लेकिन जो किसानों और दुकानदारों को नए स्लैब के तहत ही सप्लाई दी जाएगी। वहीं जूता कारोबारी कन्हैया लाल ने बताया कि जूते पर पहले 18 प्रतिशत जीएसटी था। मगर अब नए स्लैब में पांच प्रतिशत हो गया है। स्लैब बदलने का इंतजार कर रहे हैं तभी नया स्टॉक मंगाएंगे।
प्रदीप प्रजापति।
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