Ravina
पेड़🌳 पौधे पत्तियाँ
करने लगे आपत्तियाँ,
छोड़ दे नर छेड़ना तू
मैं तेरी सम्पत्तियाॅं,
जिन्दगी की ज्योति हूँ मैं
चेतना का श्रोत हूँ,
फलों- फूलों- भेषजों से
सदा ओत प्रोत हूँ,
क्यों बसाते जा रहे हो
तुम प्रदुषण बस्तियाँ,
🌲🌴🌳
,,,,,, सम्पत्तियाॅं।
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