Ravina Mishra
तुम्हारा न होना मेरे साथ है
मैं चल रही हूँ
अंतहीन सड़क पर अकेली।
तुम्हारी चुप्पी मुझे सुनाई दे रही है
कभी न पढ़ी गयी
अपनी कविता की तरह।
तुम अदृश्य हो कर भी मेरे सामने हो
किसी पुर्वाभाष की तरह।
दूरी मुझे तुम्हारे पास खिंच लाई है
किसी खोई हुई किताब के
याद किए सबक के मानिंद।
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