Laxmi Singh ख़्वाब आंखों में पलते रहे रात भर, अरमां दिल के मचलते रहे रात भर.. रख के देहरी पे अपनी निगाहें प्रिये, हम चराग़ों सा जलते रहे रात भर। शुभ प्रभात