आज अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस है, अरबी, फ़ारसी, उर्दू की भाँति बदायूँ हिन्दी भाषा एवं साहित्य में भी अग्रणी रहा है। सन् 1700 के लगभग उत्तमदास बृजभाषा के प्रसिद्ध कवि हुए हैं। उनका जन्म अगरिया ग्राम में हुआ था। कवि गंगा प्रसाद ने ‘सुबोध’ नामक चिकित्सा परक काव्य ग्रन्थ की रचना की थी। उनका जन्म महावन में हुआ था। हिन्दी व उर्दू में प्रकाशित काव्य संकलन ‘कासोख्त-ए-नमक’ के लेखक सं0 रामजीमल मझिया ग्राम के निवासी थे।
रीतिकाल एवं भारतेन्दु युग में मुन्शी त्रिलोकचन्द, मुन्शी दयाशंकर, सं0 खैराती लाल ‘जिन्दा’ तथा ठकुरी सिंह ‘अख्तर’ उस काल के प्रमुख साहित्यकार हुए हैं। मुन्शी नरायन दास ने बदायूँ में नाटकों एवं स्वांगों के युग का सूत्रपात किया। इस काल के केदारनाथ ‘अहक़र’, सं0 लक्ष्मीनाथ ‘हकीम’, ठाकुर तिरमल सिंह, उत्तम दास, ब्रिज कुमार शर्मा ‘सीकर’ भी उल्लेखनीय कवि हुए हैं। इसके अतिरिक्त भी भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावादी एवं छायावादोत्तर युग में बदायूँ के अनेक कवि हुए हैं। जनवादी कविता का प्रारम्भ करने वाले कवियों में भतरी गोवर्धनपुर ग्राम के जनकवि पं0 भूपराम शर्मा ‘भूप’ का नाम सबसे आगे है। ज्योतिष के प्रकाण्ड विद्वान एवं कवि विशम्भर मिश्र, डॉ0 लक्ष्मी नारायण कुशवाहा, डॉ0 गंगा सहाय ‘प्रेमी’ ने उत्तम साहित्य का सृजन किया। बदायूँ को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपार यश प्रदान करवाने वाले, कवि कुलगुरु डॉ. ब्रजेन्द्र अवस्थी एवं शान-ए-बदायूँ उर्मिलेश शंखधार भारतीय हिन्दी साहित्य के दैदीप्यमान सितारे थे। डॉ. ब्रजेन्द्र अवस्थी जो मूलतः लखीमपुर के निवासी थे उनका जन्म 1 जनवरी 1931 को हुआ था। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद पहले इनकी नियुक्ति हल्द्वानी और फिर कछला, बदायँू के गोविन्द बल्लभ डिग्री कॉलिज में हिन्दी विभाग में शिक्षक के पद पर हुई। कालान्तर में आप नेहरु मैमोरियल शिव नारायण दास डिग्री कालिज में हिन्दी विभागाध्यक्ष के रुप में पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी कविताओं ने प्रदेश, देश ही नहीं विदेशों में भी हिन्दी की पताका फहरायी। उनके निर्देशन में दर्जन भर शोध छात्रों ने पी.एच.-डी की उपाधि प्राप्त की। अमरीका, कनाडा में दो-दो बार, विभिन्न चैनलों, और असंख्य कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ करने पर इस हिन्दी पुत्र को अनेक सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। लगभग तीस पुस्तकों/खण्डकाव्य के रचयिता डॉॅ. ब्रजेन्द्र अवस्थी का वर्ष 2007 में निधन हो गया। डॉ. ब्रजेन्द्र अवस्थी के काव्य शिष्य डॉ. उर्मिलेश अपने कृतित्व एवं व्यक्तित्व के लिए सदैव याद किये जायेंगे। हिन्दी गीत, नवगीत और ग़ज़ल के बेताज बादशाह डॉ. उर्मिलेश बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक सफल अध्येता, कुशल समीक्षक, यशस्वी मंच-संचालक तथा जन-जन के हृदय पर आधिपत्य स्थापित करने वाले युवा हृदय-सम्राट थे। हिन्दी-जगत् में वे अल्प अवधि में ही लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गये-इसका कारण उनका चुम्बकीय व्यक्तित्व, हृदयावर्जक भावाभिव्यंजना तथा दर्शकों की हृत्तन्त्री को झंकृत कर देने वाला सुमधुर काव्य-पाठ रहा। डॉ0 उर्मिलेश का जन्म 6 जुलाई, 1951 ई. को उनकी ननिहाल इस्लामनगर (बदायूँ) में हुआ। पिताश्री स्व० भूपराम शर्मा ‘भूप’ ग्राम भतरी गोवर्धनपुर में यशस्वी जनकवि के रूप में विख्यात थे। डॉ. उर्मिलेश ने0 मे 0 शिव नारायण दास स्नातकोतर महाविद्यालय, बदायूँ में हिन्दी विभाग के रीडर/अध्यक्ष पद पर सुशोभित थे। डॉ. उर्मिलेश की साहित्य-साधना बहुमुखी थी, उन्होंने अल्प अवधि में अनेक हीरक हिन्दी जगत् को प्रदान किये, जिनकी आभा आज भी विद्यमान है। ‘साहित्य और समालोचना के सरल आयाम’, ‘नया सप्तक: व्याख्या और विवेचन के नए आयाम’ तथा ‘गीति सप्तकः पहचान और परख’ उनके प्रमुख समीक्षात्मक ग्रन्थ है। डॉ. उर्मिलेश द्वारा रचित काव्य ग्रन्थों की सूची निम्नवत् है- ‘‘सोत नदी बहती है’’, ‘‘धुआँ चीरते हुए’’ (ग़ज़ल संग्रह), ‘‘डॉ. उर्मिलेश की ग़ज़लें’’, ‘‘घर बुनते अक्षर’’ (मुक्तक संग्रह), ‘‘चिरंजीव हैं हम’’ (गीत संग्रह), ‘‘गंधों की जागीर’’ (दोहा संग्रह), ‘‘वरदानों की पाण्डुलिपि’’ (दोहा संग्रह), ‘‘बाढ़ में डूबी नदी’’ (गीत संग्रह), ‘‘फ़ैसला वो भी ग़लत था’’ (ग़ज़ल संग्रह), ‘‘धूप निकलेगी’’ (ग़ज़ल संग्रह), ‘‘जागरण की देहरी पर’’ (गीत संग्रह), ‘‘बिम्ब कुछ उभरते हैं’’ (गीत संग्रह) तथा ‘‘आईने आह भरते हैं’’ (ग़ज़ल संग्रह)। विनय कैसेट्स, नीमच (म. प्र.) ने ‘‘डॉ. उर्मिलेश कैसेट्स’’ तथा डॉ. विष्णु सक्सेना ने ‘‘डॉ. उर्मिलेश के गीत’’ कैसेट की भावभीनी गीतांजलि प्रस्तुत की है। डॉ० उर्मिलेश की काव्य-साधना विराट है, उनका चिन्तन राष्ट्रव्यापी है, वे रस-सिद्ध कवि और नये तेवर के यशस्वी ग़ज़लकार रहे। बदायँू क्लब के सचिव के रुप में जिले की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों को एक नया आयाम दिया। उनके द्वारा स्थापित ज़िले का प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव ‘बदायूँ महोत्सव’ आज प्रदेश एवं देश के प्रमुख आयोजनों में से एक है। ‘गीत गन्धर्व’, ‘भारतश्री’, ‘साहित्य सारस्वत’, ‘युग चारण’, ‘कवि भूषण’ तथा ‘राष्ट्रकवि’, ‘यशभारती’ जैसें असंख्य अलंकरणों से सम्मनित डॉ. उर्मिलेश का 16 मई 2005 को निधन हो गया। उनके बाद बदायूं क्लब और
बदायूं महोत्सव की बागडोर अब उनके पुत्र डॉ. अक्षत अशेष उसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी स्मृति में बदायूं क्लब में उनकी प्रतिमा, उनके नाम से एक मार्ग, रेलवे स्टेशन एवं ब्राहम्ण धर्मशाला में सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय का निर्माण कार्य कराये गये हैं।
किरियामई ग्राम के निवासी डॉ. मोहदत्त ‘साथी’ हिन्दी के एक सफल व्यंग्यकार, ग़ज़लकार एवं सम्पादक के रुप में प्रसिद्ध रहे हैं। शमशेर बहादुर ‘आँचल’ व्यंग्य विधा के श्रेष्ठ वरिष्ठ कवि हैं। उझानी के टिल्लन वर्मा बाल गीतकार, नवगीतकार एवं कुशल सम्पादक रहे हैं। डॉ. राम बहादुर ‘व्यथित’ एक प्रसिद्ध कवि, लघुकथाकार, समीक्षक एवं सम्पादक के रुप में देश की असंख्य पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर यश अर्जित करनेवाले यशस्वी साहित्यकार हैं। इनकी पांच पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। ग्राम धर्मसुर (सहसवान) के बिजेन्द्र जी, दातागंज निवासी रमेश शेखर, ग्राम धनौरा (दातागंज) के राजकुमार सक्सेना ‘राज’ की रचनाएँ पाठकों द्वारा ख़ूब सराही गयी हैं। बिल्सी निवासी काका देवेश हास्य व्यंग्यसरक काव्य के शीर्ष पुरोधा रहे। नरेंद्र गरल ख्यातिप्राप्त गीतकार और गज़लकार के रुप में आज भी साहित्य सृजन में अग्रसर हैं। व्यंग्य के क्षेत्र में बालम, बेधड़क, नीरज अशेष, उमेश ‘अकेला’, भुल्लड़, डॉ0 राधेश्याम ‘तपन’, तथा रामलाल ‘अनजाना’ के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। बदायूँ की कवयित्रियों में डॉ0 गिरीश रस्तोगी, स्व0 निर्मला मिश्रा, सुमंगला ‘प्रभा’, कुसुम कुमारी रस्तोगी, इन्दिरा रस्तोगी, डॉ. माधुरी लता सिंह, मिथिलेश मथुरिया, शारदा पाराशर, विभिन्न विषयों की ज्ञाता डॉ0 महाश्वेता चतुर्वेदी, राजेश्वरी इन्दु, गीतांजलि सक्सेना, पुुष्पलता शर्मा, डॉ. कमला माहेश्वरी, डॉ0 नीरजा द्विवेदी, मंजरी, सरोज गर्ग, डॉ0 शुभ्रा माहेश्वरी, डॉ0 दीप्ति जोशी के नाम उल्लेखनीय हैं। अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर बदायँू के नाम को आगे बढ़ाया है डॉ0 सोनरुपा विशाल ने जो हिन्दी काव्य मंचों की श्रेष्ठ कवियत्री हैं। वामपंथी प्रगतिशील समीक्षा के ‘मधुरेश’ ज्योति स्तंभ हैं। रामनाथ ‘सुमन’ मुक्तक सम्राट कहे जाते हैं। डॉ. सुभाष वशिष्ठ नवगीत के सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं, आपका नाट्य जगत के क्षेत्र में विशेष योगदान है, आप ही की कोशिशों से बदायँू में रंगायन संस्था के माध्यम से सफल नाटकों का मंचन सम्भव हो सका। निबंध लेखन के क्षेत्र में रामगोपाल मिश्र, डॉ0 उदयवीर सिंह, डॉ0 गंगा सहाय ‘प्रेमी’, पं0 धर्मपाल विद्यालंकार, तथा डॉ0 ग़ुलाम मुस्तफ़ा के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं। कथा साहित्य के क्षेत्र में द्विजेेन्द्रनाथ मिश्र (कुंवरगाँव निवासी) ने उल्लेखनीय कार्य किया है। हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में डॉ. हरदयाल, डॉ0 प्रदीप सक्सेना, डॉ0 देवर्षि सनाढ्य, वाचस्पति उपाध्याय, स्व0 डॉ0 टीकम सिंह तोमर, डॉ0 वीरेन्द्रपाल शर्मा, डॉ0 प्रेमी, तथा डॉ0 गिरीश रस्तोगी उल्लेखनीय हैं। भाषा विज्ञान के क्षेत्र में पद्मभूषण स्व0 मंगलदेव शास्त्री, रामचन्द्र शरण, डॉ0 बाँकेलाल उपाध्याय ने उल्लेखनीय सेवा की हैं। स्व0 डॉ0 छोटे लाल शर्मा ‘नागेन्द्र’ ने श्रेष्ठ कवि सम्पादक एवं समीक्षक के रुप में साहित्य की सराहनीय सेवा की हैं। हरिशंकर सक्सेना, रामनिवास ‘अधीर’, परदेशी ‘कायस्थ’, प्रख्यात समालोचक डॉ0 अमीर चन्द्र वैश्य, रोशनलाल कौशिक, प्यारे सिंह यादव, श्रीपाल सिंह, मुन्ने सिंह ‘आँचल’ डॉ0 अवधेश पाठक, अशोक प्रिय रंजन, प्रमोद मिश्र ‘चंचल’, राजीव गुप्त प्रभाकर’, उपेन्द्रनाथ ‘शशि’, उमाशंकर ‘राही’, महेश ‘मित्र’, डॉ0 शैलेन्द्र कबीर (ग़ज़लकार), घनश्याम ‘निशि’, कुलदीप ‘अंगार’, विनीत कुमार जौहरी ‘बदायूनी, डॉ. ऊदल राम ‘मीत’, दिनेश ‘सुमन’, मधुकर मिश्र, केदारनाथ यजुर्वेदी ‘घट’, निशांत असीम (गजलकार), घनेन्द्र ‘घन’, दुर्गेश नंदन, संजीव आर्य ‘रुप’, डॉ. उपदेश शंखधर, डॉ. सुविज्ञानंद दीपंकर, विनोद कुमार सक्सेना ‘बिन्नी’, डॉ. अरविन्द धवल, कुमार आशीष, विशाल ‘ग़ाफ़िल’, भारत शर्मा, कामेश पाठक, चन्द्र पाल सिंह ‘सरल’, गुरुचरण मिश्र, गीतम सिंह, प्रदीप रायज़ादा विशाल, विनोद सूर्यवंशी के साथ-साथ डॉ0 अक्षत अशेष, मुकेश कमल, विष्णु गोपाल अनुरागी, विवेक चतुर्वेदी, अभिषेक अनंत, आदित्य तोमर, भूराज सिंह, आनंद मिश्रा अधीर, आशीष वशिष्ठ, पुष्पराज यादव, कमल तिवारी, पवन शंखधार, षट्वदन शंखधार, आशीष शर्मा, अखिलेश ठाकुर हिन्दी साहित्य की युवा लेखनी हैं। बदायूं आज भी विश्व स्तर पर हिंदी की पताका बहुत सम्मान और गर्व के साथ फहरा रही है l
(यह लेख बदायूं जिले के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में प्रकाशित है)
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