परचम लहराएगा
प्रियंका विवेक सिंह तप तप कर इस जीवन को,
जो भी दधीचि सा बनाएगा ।
आज नहीं तो कल तय है,
वह ही परचम लहराएगा ।
तूफानों सी जिद हो जिसमें,
अंगारों की तपिश भरी हो ,
एक रोज यह संभव ही है,
वह अमृत सागर पा जाएगा ।
प्रतिपल वेदना सह सह कर,
नित आगे कदम बढ़ाते जाओ,
जो झुका नहीं हर मुश्किल से,
वह ही इतिहास बनाएगा ।
आज नहीं तो कल तय हैं ,
वह ही परचम लहराएगा ।
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