🌞 सुविचार 🌞
मनुष्य को इच्छा के अनुसार नहीं बल्कि उसकी क्षमता के अनुसार ही मिलता है। जैसे एक घड़े को चाहे समुद्र में डुबोइये, झील में डुबोईये या कुएं में उसमें जल उतना ही आयेगा।
ठीक इसी प्रकार जितनी हमारे प्रारब्ध के अनुसार क्षमता है,..प्रभु हमको उतना ही प्रदान करते हैं। हर व्यक्ति योग्यता के अनुसार कार्य सामर्थ्य भी प्रदान करते हैं। हर कोई हरेक सांसारिक काम कर भी नहीं सकता अर्थात सबका अपना अपना अलग अलग भी महत्व है । छोटा या बड़ा कोई महत्व नहीं रखता है। जो काम सूई कर सकती है वो काम तलवार नहीं कर सकती। सबको अपनी क्षमता और योग्यतानुसार ही वृति मिलती है।
यह माववीय स्वभाव है और इच्छा तो सबकी सब कुछ पाने की होती है । परन्तु क्या उसे प्राप्त करने की क्षमता और योग्यता भी होती है ? शायद नहीं। नियोक्ता (ईश्वर) तो सब कुछ जानता है। किस को क्या दायित्व देना उचित है क्या अनुचित ? क्या उसके लिए अनुकूल, लाभदायक है, क्या हानिकारक । इसलिए वो वही प्रदान करता है, जो हमारे हित में होता है।
हम परात्मा की कृपा बिना तर्क हर परिस्थितियों मे आश्रय अनुभव करते हुए अपने जीवन को सहजता से सन्तुष्ट रहकर व्यतीत करे..
कहा भी है..होई है सोई जो राम रचि राखा।
आज अपने प्रभु से अटूट विश्वास मे अनुकम्पा युक्त संरक्षण देने हेतु अलौकिक विनती के साथ !
जय श्री राधे-जय श्री कृष्णा
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