Seema Sharma चंद लफ्ज़ों में कैसे मैं खुद को बयां कर दूँ, हर रंग में ढलती हूँ, हर रूप संवार लूँ। नर्म हवा का झोंका हूँ या सावन की फुहार, मैं अपनी ही दुनिया हूँ, खुद में बेइंतहा ख़ास।