पुलिस महानिरीक्षक स्व केवल खुराना द्वारा उनकी यादों से भरा रचनात्मक ग्रन्थ
तुम आओगे ना…
तू रूठ न जाना कि न रह पाऊँगा तू मेरी साँसों की हसरत है न कह पाऊँगा तू समझ लेना मेरी रूह के जनाज़े से तेरे क़दमों के दूर जाने से जब मर जाऊँगा तुम आओगे ना.
जब तड़पेंगी आँखें तेरी आँखों को जब बाहों में भरना तुझे आखिरी हसरत होगी तुझसे मिलकर जब खुशी से रो दूँगा मैं मेरे आँसुओं और खुशी में बराबरी होगी तुम आओगे ना.
जब तुम्हारी तस्वीर भी करेगी बातें जब दिन से बेवफाई करेंगी रातें जब मेरी पेशानी पे तेरा पसीना होगा और वही गर्मी में बारिश का महीना होगा तुम आओगे ना..
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