☆ ◇ ☆ —- श्रद्धांजलि —- ☆ ◇ ☆ —-
शचीन्द्र नाथ सान्याल
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(03.04.1893 — 07.02. 1942)
शचीन्द्र नाथ सान्याल (Sachindra Nath Sanyal) एक क्रान्तिकारी एवं चन्द्रशेखर आजाद, जतीन्द्र नाथ दास और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के गुरु थे। क्वींस कॉलेज, बनारस में अपने अध्ययनकाल में उन्होंने काशी के प्रथम क्रांतिकारी दल का गठन 1908 में किया। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सह-संस्थापक थे। सान्याल ने 1913 में पटना में अनुशीलन समिति की एक शाखा की स्थापना की। 1912 में दिल्ली षड्यंत्र परीक्षण में सान्याल ने रासबिहारी बोस के साथ तत्कालीन वायसराय हार्डिंग पर हमला किया और फरवरी 1915 में इसका पर्दाफाश होने के बाद भूमिगत हो गए। उन्हें कईं बार जेल की सजा हुई और सरकार ने उनकी बनारस की संपत्ति जब्त कर ली। आज ही के दिन 7 फरवरी, 1942 को जेल में अपनी सजा काटते समय तपेदिक से उनकी मृत्यु हो गई ।
[9:21 AM, 2/7/2025] Ashutosh Nagla Mandir: 💐आज की कहानी💐
💐आपका सुन्दर व्यवहार💐
एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खड़ा कर पूछा कि..
आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है तो आप क्या करोगे ?
युवक ने कहा.. उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे।
गुरु जी ने पूछा.. वह लडकी आगे बढ गयी तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ?
लडके ने कहा.. हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो.. सभा में सभी हँस पड़े
गुरु जी ने फिर पूछा.. जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ?
युवक ने कहा.. 5 – 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए।
गुरु जी ने उस युवक से कहा.. अब जरा सोचिए..
आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं.. और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना।
आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए.. उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं।
घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खड़े हैं..
आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई तो वे महानुभाव खुद बाहर आए..
आप से पैकेट लिया.. आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए।
पास में बैठकर गरम खाना खिलाया.. जाते समय आप से पूछा.. किसमें आए हो ?
आपने कहा.. लोकल ट्रेन में..
उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा..
आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति महानुभाव का फोन आया.. भैया, आप आराम से पहुँच गए।
अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे ?
युवक ने कहा.. गुरु जी ! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते..
गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा.. “यह है जीवन की हकीकत”…
सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है.. पर हमारा सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है।
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अतः जीवन पर्यन्त अपने व्यवहार को सुन्दर बनाते रहिए.. फिर देखिए आपके जीवन का रंग..!!
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गूगल से साभार
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