बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
वर्ल्ड कैंसर डे आज – जिले में इलाज के नहीं इंतजाम, बाहर इलाज को मजबूर
विश्व कैंसर दिवस मंगलवार को मनाया जाएगा। जिले में इस रोग से निपटने के इंतजाम नहीं हैं। स्क्रीनिंग में मर्ज की पुष्टि होने के बाद उन्हें बरेली लखनऊ-दिल्ली रेफर किया जाता है।
वहीं, दूसरी ओर गंभीर रोग की चपेट में आने वाले रोगियों ने जिंदगी की उम्मीद को नहीं छोड़ा और संघर्ष करते हुए इस गंभीर मर्ज को मात दे दी। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से वे दूसरे मरीजों के लिए भी प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों में कैंसर से पीड़ित रोगियों की स्क्रीनिंग की जाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो वक्ष, सर्वाइकल, ब्लड, गले, खाने की नली, जबड़े के कैंसर के मरीज विभागों में आते रहते हैं। उनकी स्क्रीनिंग करने के बाद उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाता है। तंबाकू के सेवन और अनियमित दिनचर्या के कारण लोग कैंसर की चपेट में आ जाते हैं। शुरुआती दौर में जांच कराकर उपचार शुरू कराने पर इलाज संभव है। नजरअंदाज करने पर बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
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दो बार ऑपरेशन के बाद जीती जंग
बदांयू निवासी रामेश्वर वर्ष 2016 में गाल में घाव होने पर डॉक्टर को दिखाया। उनकी दवा से संक्रमण ज्यादा फैल गया। कैंसर रोग की जानकारी आने पर वे घबराएं नहीं, बल्कि उपचार शुरू किया। गाल के ऑपरेशन के बाद वह स्वस्थ हो गए। वर्ष 2021 में फिर रोग ने चपेट में लिया तो दोबारा से अलीगढ़ में ऑपरेशन कराना पड़ा। वह अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। रामेश्वर बताते हैं कि रोग की चपेट में आने वाले को घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सावधानी बरतना चाहिए।
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बचाव के तरीके
-तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट का सेवन न करें। रिसाइकिल किए ऑयल का सेवन करने से बचें। खाने में मौसमी फल और चोकर वाले आटे का सेवन करें।
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ये हैं केंसर के लक्षण
-तीन सप्ताह से अधिक समय तक मुंह या जीभ पर घाव रहना। -लगातार खांसी आना और आवाज भारी हो जाना। -भोजन निगलने में दिक्कत और बदहजमी होना। -मूत्र विसर्जन में कठिनाई और रक्तस्त्राव होना। -स्तन में सूजन, कड़ापन और खिंचाव। -मुंह का पूरा नहीं खुल पाना।
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