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*_ठाकुर जी का हँसता हुआ चेहरा_q*
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*_सासु माँ हर रोज ठाकुर जी की पूरे नियम और श्रद्धा के साथ सेवा करती थी।_*
*_एक दिन शरद ॠतु मेँ सासु माँ को किसी कारण वश शहर से बाहर जाना पड़ा_*
*_सासु माँ ने विचार किया के ठाकुर जी को साथ ले जाने से रास्ते मेँ उनकी सेवा-पूजा नियम से नहीँ हो सकेँगी।_*
*_सासु माँ ने विचार किया- कि ठाकुर जी की सेवा का कार्य अब बहू को देना पड़ेगा- लेकिन बहू को तो कोई अक्ल है नही!_*
*_कैसे ठाकुर जी को लाड़ करना है।_*
*_सासु माँ ने बहु को समझाया के बहु मैँ यात्रा पर जा रही हूँ और अब ठाकुर जी की सेवा पूजा का सारा कार्य तुमको करना है।_*
*_सासु माँ ने बहु को समझाया- कि देख! ऐसे तीन बार घंटी बजाकर सुबह ठाकुर जी को जगाना।_*
*_फिर ठाकुर जी को मंगल भोग कराना।_*
*_फिर ठाकुर जी को स्नान करवाना।_*
*_ठाकुर जी को कपड़े पहनाना।_*
*_फिर ठाकुर जी का श्रृंगार करना- ओर फिर ठाकुर जी को दर्पण दिखाना।_*
*_दर्पण मेँ ठाकुर जी का हंसता हुआ मुख देखना- बाद मे ठाकुर जी को राजभोग लगाना।_*
*_इस तरह सासु माँ बहु को सारे सेवा नियम समझाकर यात्रा पर चली गई।_*
*_अब बहू ने ठाकुर जी की सेवा कार्य उसी प्रकार शुरु किया जैसा सासु माँ ने समझाया था।_*
*_ठाकुर जी को जगाया, नहलाया, कपड़े पहनाये, श्रृंगार किया, और दर्पण दिखाया।_*
*_सासु माँ ने कहा था- कि दर्पण मेँ ठाकुर जी का हंसता हुआ देखकर ही राजभोग लगाना।_*
*_दर्पण मेँ ठाकुर जी का हंसता हुआ मुख न देखकर बहु को बड़ा आशर्चय हुआ।_*
_बहू ने विचार किया शायद मुझसे सेवा मेँ कही कोई गलती हो गई हैँ तभी दर्पण मे ठाकुर जी का हंसता हुआ मुख नहीँ दिख रहा।_
*_बहू ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया श्रृंगार किया दर्पण दिखाया।_*
*_लेकिन ठाकुर जी का हंसता हुआ मुख नहीँ दिखा।_*
*_बहू ने फिर विचार किया- की शायद फिर से कुछ गलती हो गई।_*
*_बहु ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया, श्रृंगार किया,दर्पण दिखाया।_*
*_जब ठाकुर जी का हंसता तो हुआ मुख नही दिखा- तो बहू ने फिर से ठाकुर जी को नहलाया_*
*_ऐसे करते करते बहू ने ठाकुर जी को 12 बार स्नान किया।_*
*_हर बार दर्पण दिखाया मगर ठाकुर जी का हंसते हुआ मुख नहीँ दिखा।_*
*_अब बहू ने 13वीं बार, फिर से ठाकुर जी को नहलाने की तैयारी की।_*
*_अब ठाकुर जी ने विचार किया- कि जो इसको हँसता हुआ मुख नही दिखा- तो ये तो आज पूरा दिन नहलाती रहेगी।_*
*_अब बहू ने ठाकुर जी को नहलाया,कपड़े पहनाये, श्रृंगार किया- और दर्पण दिखाया।_*
*_अब बहू ने जैसे ही ठाकुर जी को दर्पण दिखाया- तो ठाकुर जी अपनी मनमोहनी मंद मंद मुस्कान से हंसे।_*
*_बहू को संतोष हुआ- कि अब ठाकुर जी ने मेरी सेवा स्वीकार करी।_*
*_अब यह रोज का नियम बन गया,और ठाकुर जी रोज हंसते।_*
*_सेवा करते करते अब तो ऐसा हो गया- कि बहू जब भी ठाकुर जी के कमरे मे जाती- बहू को देखकर ठाकुर जी हँसने लगते।_*
*_कुछ समय बाद सासु माँ वापस आ गई।_*
*_सासु माँ ने ठाकुर जी से कहा की प्रभु क्षमा करना अगर बहू से आपकी सेवा मेँ कोई कमी रह गई हो तो अब मैँ आ गई हूँ आपकी सेवा पूजा बड़े ध्यान से करुंगी।_*
*_तभी सासु माँ ने देखा- कि ठाकुर जी हंसे- और बोले की मैय्या आपकी सेवा भाव मेँ कोई कमी नहीँ हैँ! आप बहुत सुंदर सेवा करती हैँ- लेकिन मैय्या दर्पण दिखाने की सेवा तो आपकी बहू से ही करवानी है…!_*
*_इस बहाने मेँ हँस तो लेता हूँ।_*
*_निश्छल सेवा भाव से प्रभु भी प्रफुल्लित होते है।_*
*_🌸 जय श्री राधे 🌸_*
*_🪷 ।। गूगल से साभार। 🪷_*
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