मानसी ( somdalal ) Mansi " जी मुझे दर्द लिखना पसंद नहीं , चोट खाई हुई अदाओ का तमाशा करना पसंद नहीं , यू नहीं की इश्क में मुझे रौशनी ही मिली , अंधेरा का बस मुझे तमाशा करना पसंद नहीं ,,