Vandana shukla
#बचपन
नव जीवन का अभिनंदन करता
नव आशाओं की नव डोरी से
अपनी यात्रा आरम्भ है करता
निज अंतर्मन के नव सपनों से….!!
तरुणाई में इस मन में फिर
नित नयी उमंगों भरती हैं
आंखों के रस्ते कोई अध खिली कली
चुपके से मन में उतरती है………!!
#सुनहरे_ख्वाबों का दौर दिल को
नव यौवन तक लेकर आता है
मन में नव आशाओं के दीप जला
कोई इस मन में बसता जाता है…….!!
धीरे धीरे फिर कोई
दिल की धड़कन बन जाता है
पता ही नहीं चल पाता है और
दिल #तलबगार_तेरा हो जाता है…..!!
अपने प्यार से मिलने को
वह जल बिन मछली सी तड़पती है
बन किसी के ख्वाबों की #नूरजहां
अब रातों को भी जगने लगती है……!!
अब उसके दिल की धड़कन
उसकी ही दुश्मन बनती
प्यार किसी का उसके दिल में
उसकी तड़प को और बढाता है……!!
#झुमके_बरेली_का कोई तोहफा
प्यार का उसको भिजवाता है
कच्ची सी कली खिलकर
अब प्यार में गुलाब बन जाती है……!!
नव यौवना बनते बनते
प्यार के सपने बुनते बुनते
प्यार की राहों पर चलकर
#प्यार_की_मंजिल पा जाती हैं…..!!
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