Mahi बैठी" हूँ तेरे इंतज़ार में जैसे दुआ ठहरी हो किसी असर के लिए हर आहट पे ये दिल, अब भी चौंक जाता है जैसे तेरा नाम हवाओं में, कोई धीरे से गुनगुनाता है वक़्त ने बहुत कुछ बदला मगर ये चाहत नहीं बद