Ravina Mishra
एक शब्द पाखी
दुख के आवर्त में
घिर!
उड़ता है आकाश में
तलाशने,
अपने हीं रुदन का
श्रोत,
कुछ देर तक,
कुछ दूर तक,
फिर, लौट आता है
वहीं,,,,
जहाँ से भरी
उसने उड़ान
खाली हाथ
रीते मन
रुदन,,,,,
जो कभी स्तवन बना
उसकी आत्मा का
उड़ते हुए,,,,
जाने कहाँ खो गया ।
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