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वासंतिक नवरात्र चतुर्थी दिवस मां कुष्मांडा देवी पूजन: आचार्य राजेश कुमार शर्मा

वासंतिक नवरात्र चतुर्थी दिवस मां कुष्मांडा देवी पूजन: आचार्य राजेश कुमार शर्मा

मां कूष्मांडा का स्वरूप

मां कूष्मांडा, मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मानी जाती हैं और उनका रूप बेहद तेजस्वी व दिव्य होता है। उन्हें सृष्टि की रचयिता कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि उन्होंने अपनी हल्की सी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी। मां कूष्मांडा का वर्ण (रंग) स्वर्ण के समान चमकदार बताया गया है, जिससे उनका रूप अत्यंत आकर्षक और उज्ज्वल दिखाई देता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। मां के आठ हाथ होते हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा होती है, जबकि एक हाथ में जपमाला रहती है। मां कूष्मांडा का यह स्वरूप शक्ति, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा करने पर मां की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, हल्के या हरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थान पर मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से स्थान को शुद्ध करें और दीपक जलाएं। मां को कुमकुम, अक्षत, फूल (खासकर पीले या लाल), धूप और दीप अर्पित करें।
इसके साथ ही फल और मिष्ठान चढ़ाएं। मां कूष्मांडा को खासतौर पर मालपुआ या मीठा भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे मां प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद देती हैं। पूजा के दौरान मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है। पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करें।
मां कूष्मांडा का भोग

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ अर्पित करना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में खुशहाली और समृद्धि आती है। आप खीर, हलवा या अन्य मीठे पकवान भी भोग में चढ़ा सकते हैं। ये सभी मां को प्रिय माने जाते हैं। इसके अलावा भोग में ताजे फल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) अर्पित करना भी शुभ होता है।

मां कूष्मांडा ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।

कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

मां कूष्मांडा की स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कूष्मांडा की प्रार्थना

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
मां कूष्मांडा बीज मंत्र

ऐं ह्री देव्यै नम:

आचार्य राजेश कुमार शर्मा
9058810022
9897158598

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