Gunjan Agrawal कुछ "दुख" इतने "अथाह" होते हैं.. जिनकी कि कोई परकाष्ठा ही नहीं होती, वे तो न चाहते हुए भी, बरबस ही छलक पड़ते हैंअपने प्रियतम के सामने.. कभी उससे आलिंगित होकर, तो कभी सिर्फ उसे देखने भर से ही..!!! गुंजन शिशिर