Gunjan Agrawal
स्याह रात में चारों ओर पसरा सन्नाटा,…
शब्दों में बहती खामोशी,..
आंखों का सूनापन,..
हृदय में उमड़ते अश्रुओं के सैलाब को देखकर,
आज यकीनन ईश्वर भी द्रवित हो उठे होंगे..
और मुझे मेरे ईश्वर से मिलाने के लिए,
शायद प्रयासरत होंगे..!!!
गुंजन शिशिर
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