Ravina Mishra🧚♀️
आस के रंगी पत्थर कब तक गारों में लुढ़काओगे,
शाम ढले इन कोहसारों में अपना खोज न पाओगे।
जाने पहचाने चेहरे अपनी शम्त बुलाएँगे,
कदम कदम पर लेकिन अपने साए से टकराओगे।
फनकारों का जहर तुम्हारे गीतों में गाहे जम जाएगा,
कब तक अपने होंठ मेरी जाॅं! सांपों से डसवाओगे।
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