Ritu Sharma
कौन हो तुम?
उस शख़्स के चेहरे में
कई रंग छुपे थे,
चुप था तो कोई और था,
बोला तो कोई और।
दो-चार क़दम पर ही
बदलते हुए देखा,
भीड़ में एक चेहरा,
अकेले में दूसरा।
ठहरा तो कोई और था,
गुज़रा तो कोई और
जैसे हर मोड़ पर
नई पहचान पहन लेता हो।
समझ नहीं आया
असल कौन-सा था,
या शायद
असल कभी था ही नहीं।
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