neelam
ऊपर-ऊपर रंग लगइयो
न करियो कुछ अंदर,
भीगे ऊपर मेरा तन- मन
शोले भड़के अंदर
रंग बिना मेरा अंग रंगा है
तेरी छुअन ने क्या गजब किया है,
मै ठहरी सिंदूर सुहागन
फिर भी क्यो मन बहक गया है
होली के रंग बदन में पड़ते
तन मन सब कुछ भड़के
अंग से अंग लगाना
ओ रसिया ऐसे रंग लगाना…
💙💚🩷
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