Piyano
एक शाम थी शांत और थोड़ी सी भारी
वो दोनों आमने सामने बैठे थे शब्द कम थे पर खामोशी बहुत कुछ कह रही थी
वो बोला
कभी ऐसा भी हो रूबरू तुम बैठो
हमारी आँखों से ज़रा खुद को देखो
वो धीमे से बोली
तेरी नज़रों में जो ठहराव है
शायद वहीं मेरी पहचान छुपी है
उसने पहली बार नज़र उठाकर उसे देखा
उसकी आँखों में शिकायत नहीं थी इंतज़ार था जैसे वो चाहती हो कि वो खुद को उसकी मोहब्बत में पहचाने
वो मुस्कुराया मगर दिल में हलचल थी
उसे डर था अगर सच में वो उसकी आँखों से खुद को देख लेगा तो शायद लौट नहीं पाएगा
वो फिर बोला
हमारे दिल की लगी लगे तेरे दिल को
वो हल्का सा करीब आई और कहने लगी
ये लगी खेल नहीं
ये वो सच है जो ठहरने का हौसला मांगता है
उसने धीरे से कहा
रूबरू बैठूँ तो सच बिखर जाएगा
तेरी आँखों में मेरा राज़ उतर जाएगा🌹🌹🌹❤️❤️❤️🥰🥰💐💐😍😍
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