2:35 pm Thursday , 30 July 2026
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एक शाम- Piyano

Piyano

एक शाम थी शांत और थोड़ी सी भारी
वो दोनों आमने सामने बैठे थे शब्द कम थे पर खामोशी बहुत कुछ कह रही थी

वो बोला
कभी ऐसा भी हो रूबरू तुम बैठो
हमारी आँखों से ज़रा खुद को देखो

वो धीमे से बोली
तेरी नज़रों में जो ठहराव है
शायद वहीं मेरी पहचान छुपी है

उसने पहली बार नज़र उठाकर उसे देखा
उसकी आँखों में शिकायत नहीं थी इंतज़ार था जैसे वो चाहती हो कि वो खुद को उसकी मोहब्बत में पहचाने

वो मुस्कुराया मगर दिल में हलचल थी
उसे डर था अगर सच में वो उसकी आँखों से खुद को देख लेगा तो शायद लौट नहीं पाएगा

वो फिर बोला
हमारे दिल की लगी लगे तेरे दिल को

वो हल्का सा करीब आई और कहने लगी
ये लगी खेल नहीं
ये वो सच है जो ठहरने का हौसला मांगता है

उसने धीरे से कहा
रूबरू बैठूँ तो सच बिखर जाएगा
तेरी आँखों में मेरा राज़ उतर जाएगा🌹🌹🌹❤️❤️❤️🥰🥰💐💐😍😍

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