Gunjan Agrawal "रात" एकबार फिर से, पलकों की दहलीज पर ही गुजर गई.. एक सिर्फ इसी कशमकश में कि, "याद" तुम मुझे आ रहे हो.. या फिर "याद" तुम मुझे कर रहे हो..!!! गुंजन शिशिर