PRIYA SHARMA
परहेज़ की बातें अब रहने भी दो,
इश्क़ दवा नहीं…जो नापा-तौला जाए।
लत अगर लगनी है, तो तुम्हारी ही लगे,
सुकून भी तुम… बेचैनी भी तुम ही कहलाए।
जब आँखों से बात होने लगे ख़ामोशी में,
तो नाम, पहचान सब धुंधला सा हो जाए…
बस एक एहसास रहे —
तुम मेरे… और मैं तुम्हारी हो जाऊँ
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