सारिका सिंह (मनी )
दौर ऐ कयामत तक इश्क जिन्दा रहेगा
नादा लोगो की फ़ितरत भी सहेगा..
किसी को फ़िक्र होंगी इश्क का अंजाम बुरा न हो
कोई इश्क को फितना समझ खेल जायेगा..
बड़ा अजब है दौर यारों कोई चिराग बुझा कर
अपना गैरो मे रास रचाएगा..
मत जाना तुम नादा बस्तीयो मे ए इश्क
वहाँ चाँद भी सूरज नजर आएगा…
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