neelam
उठी आंखे जो बात कह न सकी
झुकी आंखे वो कहती
मदहोश ये करती
जो बात तुमसे कहना चाहे जुबां,
आंखें वो कहती है
ये मेरी कहा सुनती
इस दिल की नादानिया माफ हो
ख्यालो की शोखिया माफ हो
हरदम तुम्हे सोचती है,
टक-टक तुम्हे देखती है
बेशर्म आंखो की शर्म हयां माफ हो
आंखो की गुस्ताखियां माफ हो…
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