सारिका सिंह (मनी )
मुझसे इश्क करके पत्थर भी धड़क उठे
डाल दी जान तूने इश्क के खुदा वो बोल उठे
गरूर बहुत था जिसको चाहूंगी मै वो खिल उठे
मेरे गरूर को उसने रोन्द डाला
चाहा जिसे उसके कदमो मे हम ही गिर पड़े
बड़ा शातिर निकला देकर दिल अपना
मेरे नैना रो उठे
ये फ़साना है हकीकत हम खुद से खुद को खो उठे.
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