Chaudhary Sahiba
तुम और मैं
हम बनाएँगे नई दुनिया
जहाँ सपने साकार होंगे
आज़ाद होगा बचपन तुम सिखाना
मासूमों को चमकने की कला इस क़दर
कि आकाश भी आए माँगने
इन चमकते सितारों को
अपने कम होते जुगुनुओं के बदले
मैं सितारों के बीच में अपने चाँद को देखते हुए बनाऊँगी
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