Chaudhary Sahiba
हमे दर्द देने के लिए तो सारा ज़माना है
बैठो पास हमें तुम्हे कुछ बताना है
चिलचिलाती धूप में यूं खड़ा है एक पेड़
ये भटकते हुए मुसाफिरों का ठिकाना है
कहीं भटक रहा हो गम तो पता बता दो
ये मेरा दिल अब गमों का आशियाना है
मर गया हूं तुझको याद करते करते
मुझको अपने इस जनाजे को उठाना है
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